Header Ads

Header ADS

railway privatisation news

13 सितम्बर 2020
चेन्नई 

Er Ezaj Alam पेशे से ट्रेन ड्राइवर थे लेकिन रेलवे के निजीकरण के बाद नोकरी से हाथ धो बैठे और फ़िलहाल चेन्नई के श्रावणभवन रेस्टोरेंट में एक वेटर है। रोज़मर्रा की तरह दो ग्राहक श्रावणभवन में नाश्ता करने के लिये आये और उन्होंने ezaj alam को बुला कर अपना नाश्ता ऑर्डर किया। नाश्ता किया अपना बिल चुकाया और चले गये। 


ग्राहकों के उठने के पश्चात एजाज आलम ने एक कपड़ा लिया और टेबल साफ करना शुरू किया। इतने में एजाज की नज़र एक पॉलीथिन पर गयी जो वहीं पड़ा था जहाँ उन दोनों ने बैठ कर नाश्ता किया था। 

एजाज आलम ने पॉलीथिन उठाया तो उसमें से 2000 के नोटों की गड्डियां गिरनी शुरू हो गयी। एजाज आलम के अनुसार उस समय उस पॉलीथिन में से 10 गड्डियाँ नीचे गिर चुकी थी। यानि 2000000( बीस लाख ) रुपये ज़मीन पर गिरे हुए थे और इसके अलावा भी पॉलीथिन में और पैसा मौजूद था। 

एक सामान्य वेटर जिसकी मासिक तनख्वाह मात्र 8000 प्रतिमाह है और उसके आगे 20 लाख रुपया पड़ा हुआ है। 

नीयत फिसलनी चाहिये थी ? 

हाँ या ना ? 

शायद हाँ ! 

हिसाब से  देखें तो 2500000 लाख रुपया कमाने में 8000 रुपये प्रतिमाह कमाने वाले को दशकों लग जाएंगे। 
नीयत फिसलनी चाहिये थी। 

परन्तु ऐसा हुआ नहीं । 

एजाज आलम ने एक एक नोट उठाया । काउंटर पर बैठे मैनेजर के पास गया और बड़ी ही ईमानदारी से सारे का सारा पैसा मैनेजर के हाथ मे थमा दिया। 

मैनेजर ने पैसे गिने तो होश उड़ गये।पॉलीथिन में कुल 2500000( पच्चीस लाख रुपये) मौजूद थे। मैनेजर ने मालिक को बताया और कुछ देर उन ग्राहकों का इंतज़ार किया गया जो पॉलीथिन भूल गये थे। जब कोई ना आया तो पैसे से भरे पॉलिथीन को स्थानीय पुलिस स्टेशन में जमा करवा दिया गया। इस दौरान एजाज आलम अपने घर लौट गया । 

परंतु जब वह वापिस आया तो वह एक "स्टार" बन चुका था। मैनेजर ने एजाज आलम की ईमानदारी की कहानी सोशल मीडिया पर क्या पोस्ट की सारे चेन्नई ने एजाज आलम की ईमानदारी को झुक कर सलाम किया । इसी बीच रेस्टोरेंट के मालिक वहां आ पहुंचे और उन्होंने एजाज आलम को एक सोने की अंगूठी भेंटस्वरूप दी। 

स्थानीय पुलिस स्टेशन की ओर से रवि की ईमानदारी की सराहना में उसे एक घड़ी भेंट की गई। एजाज आलम अब वहां पर एक जाना पहचाना नाम बन चुका है। 

लोकल मीडिया ने भी एजाज आलम की ईमानदारी की कहानी को अखबार के फ्रंट पेज पर छापा था।  2500000 सामने थे और एजाज आलम की नीयत नहीं डगमगाई। यही नहीं एक स्थानीय पत्रकार के जवाब में रवि ने भेंटस्वरूप मिली अंगूठी और घड़ी दिखाते हुए बड़े गर्व से तमिल भाषा में कहा ...... என் நேர்மைக்காக எனக்கு வெகுமதி கிடைத்தது 

अर्थात " मुझे अपनी ईमानदारी का ईनाम मिला है"। 

मैं तो कभी कभी सोचता हूँ के अगर सरकार हर खाते में 1500000 जमा करवा भी दे तो कई लोग तो इतने ईमानदार और खुद्दार हैं के फ्री के पैसे को वापिस नेताओं के मुँह पर मार आएंगे। 

नीयत की बात है । डोलने लगे तो सड़क पर पड़े 100 के नोट पर डोल जाती है और दिल में ईमानदारी हो तो सामने पड़े 2500000 पर भी नहीं डोलती।।

(Repost)
साभार~ Arham Zuberi

No comments

Powered by Blogger.