माथे पर सेयह दाग
गर्मी की शिद्दत और लो ने मेरी सांस लेना मुहाल किया हुआ था और ऊपर से गाड़ी की ऐसी भी काम करना छोड़ दिया था
मैंने गाड़ी की हिट कम करने के
लिए ड्राइवर
, रोड के किनारे पेड़ की छांव में गाड़ी खड़ी करने के लिए कहा और गाड़ी से नीचे उतर कर ताजा हवा खाने लगी
और बड़बड़ा रही थी
इस ए सी को भी आज ही खराब होना था
मैं मुंह में बढ़ बड़ाई कि
अचानक मुझे एक मासूम सी आवाज अपनी तरफ मत मुखातिब करने लगी
मैडम जी मेरे भाई ने सुबह से कुछ नहीं खाया
प्लीज पेंसिल खरीद लीजिए सुबह मेरी एक पेंसिल
भी नहीं बिकी
यह कोई 12 13 साल की बच्ची थी जो एक हाथ में पेंसिल का बंडल और दूसरे हाथ की उंगली में अपने छोटे भाई का हाथ थामे हुए मुझे मुखातिब कर रही थी
उसका छोटा भाई अजीब सी सवालिया नजरों से कभी मेरी तरफ कभी अपनी बहन को देख रहा था
मैडम जी ले लो ना एक पेंसिल सिर्फ ₹10 का
ह
मेरा गर्मी से बुरा हाल था जी चाहा कि उन दोनों को भगा दूं मगर फिर न जाने क्यों ना चाहते हुए भी मेरा हाथ पर्स में गया और मैंने 50 का नोट उसकी तरफ बढ़ाते हुए खुद, बड़ा सखी बनती हुई बड़े ,
तकबुराना अंदाज में बोली यह लो
बच्ची मेरे लहजे से बेनियाज़ जल्दी से बोली मैडम जी कितनी पेंसिल दूं،
10 की एक है और 50 की पांच उसकी आवाज और आंखों में अजीब सी खुशी थे मैडम जी 5 ले लो मैं भी सुबह से भूखी हूं और वह पेंसिल गिनने लगी ا ،،
मुझे उस पर अजीब सा गुस्सा आने लगा और दूसरी तरफ मुंह फेर के बोली ले जाओ पैसे और जान
छोरो नहीं चाहिए मुझे पेंसिल
दूसरी तरफ कोई जवाब नहीं था बस खामोशी
थी चंद लम्हों बाद यह सोचकर मैंने रुक फेरा
कि वह दोनों जा चुके होंगे मगर यह मेरा अंदाजा गलत निकला
, बच्चे की आंखों में नमी थी और और उसकी आवाज उसके हलक में
दबी थी
50 का नोट मेरी तरफ बढ़ाकर मुझसे बोली नहीं मैडम
मैं भीख नहीं मांगती मां कहती है जो भीख मांगते हैं कयामत के दिन उनके माथे पर
सिया दाग होगा
यह कहकर उसने 50 का नोट मेरे हाथ में थमा दिया और अपने भाई का हाथ पकड़ कर वापस मुड़ गई
मैं फटी आंखों से उन्हें जाता हुआ देख रही थी मुझे मेरा दिल किसी बहुत ही गहरी खाई में गिरता हुआ महसूस हो रहा था
उसका यह जुमला मेरे कानों और ध्यान में जोर-जोर से गूंज रहा था
मां कहती है जो भी मांगते हैं कयामत के दिन उनके माथे पर से दाग होगा
मेरा जिस्म पसीने से तर हो गया मगर अब की बार गर्मी से नहीं बल्कि नेदामाद शर्मिंदगी से
मैं खुद को बहुत छोटा और हकीर समझ रही थी
जो बिल्कुल सच था इस दफा मेरी आवाज मेरे हालत में कांटे की तरह चुभ रही थी और मैं उन्हें जाता हुआ देख रही थी बहुत मुश्किल से मैंने उन्हें आवाज दी
मेरी आवाज घबराई हुई थी और मेरी आवाज पर दोनों भाई बहन मुड़कर मेरी तरफ देखा और उनकी आंखों में आंसू थे मैंने बहुत मुश्किल से अपने आंखों आशु छुपाए
कितनी पेंसिल है तुम्हारे पास बच्चे ने अपने भाई का हाथ छोड़ा दूर कर मेरे करीब आकर मुझसे पूछा मैडम जी आप सारी पेंसिल ले लूंगी
उसकी आंखों में अजीब सी चमक थी
मैंने दूसरी तरफ मुंह करके आशु पूछते हुए कहा हां सारी लूंगी कितने की है सब
मैं उसके सामने रोना नहीं चाहती थी
मगर दूसरी तरफ मुंह करके मेरा जप्त टूट गया और आंसू भरी आंखों से मेरे गालों पर बह गए मैं किन आंखों से बस एक बार उसे देख पाई थी जो पेंसिल की नहीं थी मेरा दिल चाह रहा था मैं बच्चों की तरह फूट कर रो लूं मैडम जी 9 पेंसिल है सारी
₹10 के हिसाब से ₹90 हुए
वह मेरी तरफ पेंसिले करके हिसाब बता रही थी मैंने भारत से पर्स से सौ का नोट निकाला और उसे थमा दिया कुछ नहीं भाई के हाथ से ₹10 का एकलौता नोट मुझे पकड़ा दिया जो शायद सुबह से अब तक की कमाई थी शुक्रिया मैडम जी
मैं चाहती थी उसके मासूम और नन्हे हाथ जोड़ लूं और मेरे पति जितने पैसे हैं सब उन्हें दे दूं मगर उसके खुद्दारी मैं देख चुकी थी मैं
मैं उन्हें दूर जाता हुआ देखती रही और मेरी आंखों में अब की बार खुशी और एहसास क्या सोते ओपन तेरे आज भी मेरे पास है उन्हें जब भी देखती हूं अजीब सी दिलकश एहसास में गुम हो जाती हो और वह जुमला है मेरी सोचो मैं बार-बार गूंजने लगता है मां कहती है जो भीख मांगते हैं क्या मत के दिन उनके माथे पर पर सिया दाग होगा
हमारे मोआसरे में जो लोग भीख मांगने को हुनर समझते हैं अल्लाह पाक ऐसे लोगों को हिदायत दे،،،،ہ
No comments